पेंशन अदालत की विकेन्द्रित व्यवस्था

पेंशन प्रकरणों के निस्‍तारण की इस विकेन्द्रित व्‍यवस्‍था से प्रकरणों के निस्‍तारण में नि:सन्‍देह तेजी आयी है। इस कार्य को और अधिक गतिशीलता प्रदान करने के लिए सेवानैवृत्तिक लाभों से सम्‍बन्धित सभी प्रकार की समस्‍याओं के निराकरण हेतु शासन द्वारा शासनादेश संख्‍या सा-3-923/दस-96 -17/95,दिनांक 19 अगस्‍त,1996 सचिव,वित्‍त की अध्‍यक्षता मे पेंशन अदालत का गठन किया गया है तथा एक प्रारूप  निर्धारित किया गया है जिसके माध्‍यम से कोई भी सेवा निवृत्‍त शासकीय सेवक अथवा मृत शासकीय सेवक के परिवारजन सेवानैवृत्तिक लाभों से सम्‍बन्धित अपनी समस्‍याएं इस पेंशन अदालत को सन्‍दर्भित कर सकते हैं। पेंशन अदालत में पेंशनर को यह सुविधा  होती है कि वह अदालत के समक्ष उपस्थित होकर अपनी समस्‍याओं से सम्‍बन्धित अपना पक्ष रख सकता है और विभाग को भी उसी समय उसका प्रतिउत्‍तर देना होता है। इन दोनों के उत्‍तर प्रतिउत्‍तर के आधार पर यह अदालत शासन के संगत नियमों और प्रक्रियाओं के अधीन समस्‍याओं के समाधान हेतु निर्णय देती है। बाद में निर्णयो के क्रियान्‍वयन हेतु अपेक्षित कार्यवाही के लिये सम्‍बन्धित विभागों को सूचित किया जाता है तथा गहन समीक्षा द्वारा इन निर्णयो का क्रियान्‍वयन सुनिश्चित किया जाता है। इन पेंशन अदालतों के माध्‍यम से पेंशन प्रकरणों के निस्‍तारण के सम्‍बन्‍ध में शासन द्वारा पेंशन मामलों का प्रस्‍तुतीकरण, निस्‍तारण एवं विलम्‍ब का परिमार्जन नियमावली 1995 के प्राविधानो के अनुसार कार्यवाही कराकर पेंशनरों की समस्‍यों के शीघ्र समाधान की व्‍यवस्‍था की गयी है साथ ही इस नियमावली के प्राविधानो के अनुरूप कार्यवाही न किये जाने पर सम्‍बन्धित कर्मचारी/अधिकारी के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही जैसी दण्‍डात्‍मक कार्यवाही किये जाने की व्‍यवस्‍था भी है।

                पेंशन अदालत की यह व्‍यवस्‍था केन्‍द्रीयकृत व्‍यवस्‍था होने के कारण अपेक्षित रूप व्‍यापक नहीं थी फलस्‍वरूप बहुत अधिक प्रभावी नहीं हो पा रही थी। अनुभव के आधार पर यह देखा गया,कि एक पेंशन अदालत के आयोजन में लगभग 3 माह का समय लग जाता था। समय साध्‍य होने के कारण वर्ष भर में अधिक से अधिक 4 पेंशन अदालतों का आयोजन सम्‍भव हो पा रहा था जो कि प्रदेश के लगभग 1/5 भाग को आच्‍छादित कर सकता था। अधिक से अधिक लोगों को लाभ पहुचाने एवं इसे और अधिक व्‍यापक बनाने के उद्देश्‍य से शासन द्वारा शासनादेश संख्‍या सा-3-1186/दस-98-17/95, दिनांक 15 सितम्‍बर,1998 द्वारा पेंशन अदालत को विकेन्‍द्रीकृत कर मण्‍डल स्‍तर पर मण्‍डलायुक्‍त की अध्‍यक्षता में गठन करने का निर्णय लिया गया है। इस मण्‍डलीय पेंशन अदालत में मण्‍डलायुक्‍त अध्‍यक्ष, सम्‍बन्धित जनपद के जिलाधिकारी सदस्‍य, क्षेत्रीय संयुक्‍त निदेशक कोषागार सदस्‍य एवं संयोजक,  निदेशक पेंशन अथवा उनके द्वारा नामित उपनिदेशक को सदस्‍य के रूप में सम्मिलित कर गठन किया गया है। फलस्‍वरूप इनकी व्‍यापकता में अपेक्षित वृद्धि हुई है। इस व्‍यवस्‍था के अन्‍तर्गत अब तक 313 पेंशन अदालतों का आयोजन किया गया है। वितीय वर्ष 2010-11 में आयोजित 53 अदालतों में कुल 149 प्रकरण प्रस्तुत किये गए जिनमे से 100 प्रकरणों का निस्तारण किया जा चुका है|

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आगामी/सम्पादित पेंशन अदालत की जानकारी:

दिनांक स्थान स्थिति
25-02-2014 लखनऊ मण्डल आगामी
20-02-2014 मुरादाबाद मण्डल आगामी
25-01-2014 मेरठ मण्डल सम्पादित
25-01-2014 मिर्जापुर मण्डल सम्पादित
23-01-2014 देवीपाटन(गोण्डा)मण्डल सम्पादित
18-01-2014 कानपुर मण्डल सम्पादित

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