पेंशन पुनरीक्षण

वेतन समिति उत्‍तर प्रदेश,1997 की संस्‍तुतियों को स्‍वीकार करते हुए शासन द्वारा दिनांक 01-01-1996 से पूर्व सेवा निवृत्‍त राज्‍य सरकार के सिविल पेंशनरों/पारिवारिक पेंशनरों की पेंशन/पारिवारिक पेंशन के पुनरीक्षण के संबंध में शासनादेश संख्‍या सा-3-1721-दस-308/97दिनांक 23 दिसम्‍बर 1997 के अनुसार पुनरीक्षित किये जाने के आदेश प्रसारित किये गये थे। इस शासनादेश के प्रस्‍तर-4-1 में दी गयी व्‍यवस्‍था के अनुसार दिनांक 1-1-96 को पेंशन के समेकन का आधार दिया गया है। पेंशन का यह समेकन उस कोषागार द्वारा किया जायेगा जहॉ से पेंशनर अपनी पेंशन आहरित कर रहा है। इस हेतु कोषागारों की सुविधा के लिये इस शासनादेश के साथ रेडीरेकनर भी संलग्‍न किया गया हैं। शासनादेश संख्‍या सा-3-1720/दस-308-97 दिनांक 23-12-1997 द्वारा 01-01-1996 को अथवा उसके उपरान्‍त सेवानिवृत्‍त/मृत सरकारी सेवक के पेंशन/पारिवारिक पेंशन के निर्धारण-पुनरीक्षण के सम्‍बन्‍ध में आदेश निर्गत किये गये हैं। शासनादेश के प्रस्‍तर 3-1 में दी गई व्‍यवस्‍था के अनुसार दिनांक 01-01-1996 को सेवानैवृत्तिक लाभ हेतु पेंशन आगणन के लिए परिलब्धियॉ पारिभाषित की गई हैं।
                   वेतन समिति उत्‍तर प्रदेश 1997 की सिफारिश पर लिये गये शासकीय निर्णयों के क्रियान्‍वयन में 1986 के पूर्व के पेंशन भोगी एवं पारिवारिक पेंशन भोगी की पेंशन के संशोधन के संबंध में शासनादेश संख्‍या सा-3-1062/दस-308-07 दिनांक 24-8-1998 प्रसारित किया गया जिसके द्वारा वर्ष 1986 से पूर्व के समस्‍त पेंशनरों से अपेक्षा की गयी कि वे इस शासनादेश के अनुसार निर्धारित प्रारूप पर अपनी पेंशन पुनरीक्षण हेतु अपने कार्यालयाध्‍यक्ष/विभागाध्‍यक्ष जहां से वे सेवानिवृत्‍त हुये हैं को आवेदन करेंगे तथा संबन्‍धित कार्यालयाध्‍यक्ष/विभागाध्‍यक्ष 01-01-1986 की स्थिति के अनुसार उनके वेतन को सैद्धान्तिक आधार पर निर्धारित कर उक्‍त प्रारूप सहित पेंशन स्‍वीकर्ता अधिकारी को प्रेषित करेंगें। पेंशन स्‍वीकर्ता अधिकारी इस पुननिर्धारित वेतन के आधार पर उनकी पेंशन पुनरीक्षित कर संशोधित प्राधिकार पत्र संबंधित कोषागार जहॉ से पेंशनर अपनी पेंशन आहरित कर रहा है को प्रेषित करेंगें तथा उसकी सूचना सम्‍बन्धित का र्यालयाध्‍यक्ष तथा पेंशनर को भी दी जायेगी। शासनादेश संख्‍या सा-3-384/दस-300/99 दिनांक 13-04-2000 द्वारा यह व्‍यवस्‍था की गई है,कि किसी भी सरकारी सेवक की पूर्ण सेवा पेंशन उसके द्वारा धारित पद के दिनांक 01-01-1996 से पुनरीक्षित वेतनमान के न्‍यूनतम के 50 प्रतिशत से कम अथवा रू01275-00 जो भी अधिक हो,से कम नहीं होगी। किसी भी पारिवारिक पेंशनर की पारिवारिक पेंशन सम्‍बन्धित सरकारी सेवक द्वारा आहरित अन्तिम वेतन के 30 प्रतिशत,उसके द्वारा धारित पद के दिनांक 01-01-1996 से पुनरीक्षित वेतनमान के न्‍यूनतम के 30 प्रतशित अथवा रू01275-00 में से जो भी अधिक हो से कम नहीं होगी। जिन सरकारी सेवकों ने पुनरीक्षित वेतनमान को चुनने का विकल्‍प दिया है और नये वेतनमान में 10 माह की पूर्ण अवधि का लाभ पाने के पूर्व ही सेवानिवृत्‍त हो गये हैं उनकी सेवानिवृत्ति के 10 माह के पूर्व के वेतन की गणना शासनादेश संख्‍या सा-3-697/दस-308/97 दिनांक 05-05-2000 के अनुसार की जायेगी। इसके अनुसार 01-01-1996 से पूर्व देय मूल वेतन, इस पर अनुमन्‍य मंहगाई भत्‍ता,अनुमन्‍य राहत की पहली व दूसरी किश्‍त,पूर्व संशोधित वेतनमान में मूल वेतन पर 40 प्रतिशत निर्धारित लाभ तथा मूल वेतन में सैद्धान्तिक वेतन वृद्धि देते हुए दिनांक 01-01-1996 से पूर्व की अवधि के लिये पेंशन की गणना के लिये परिलब्धियॉ आगणित की जायेंगी।

                      वेतन समिति उत्‍तर प्रदेश,2008 की संस्‍तुतियों को स्‍वीकार करते हुए शासन द्वारा दिनांक 01-01-2006 से पूर्व सेवा निवृत्‍त राज्‍य सरकार के सिविल पेंशनरों/पारिवारिक पेंशनरों की पेंशन/पारिवारिक पेंशन के पुनरीक्षण के संबंध में शासनादेश संख्‍या सा-3-1515-दस-2008-308/97 दिनांक 08 दिसम्‍बर 2008 के अनुसार पुनरीक्षित किये जाने के आदेश प्रसारित किये गये थे। इस शासनादेश के प्रस्‍तर-4-1 में दी गयी व्‍यवस्‍था के अनुसार दिनांक 01-01-2006 को पेंशन के समेकन का आधार दिया गया है। पेंशन का यह समेकन उस कोषागार द्वारा किया जायेगा जहॉ से पेंशनर अपनी पेंशन आहरित कर रहा है। इस हेतु कोषागारों की सुविधा के लिये इस शासनादेश के साथ रेडीरेकनर भी संलग्‍न किया गया हैं। शासनादेश संख्‍या सा-3-1508/दस-2008-308-97 दिनांक 08-12-2008 द्वारा 01-01-2006 को अथवा उसके उपरान्‍त सेवानिवृत्‍त/मृत सरकारी सेवक के पेंशन/पारिवारिक पेंशन के निर्धारण-पुनरीक्षण के सम्‍बन्‍ध में आदेश निर्गत किये गये हैं। शासनादेश के प्रस्‍तर 3-1 में दी गई व्‍यवस्‍था के अनुसार दिनांक 01-01-2006 को सेवानैवृत्तिक लाभ हेतु पेंशन आगणन के लिए परिलब्धियॉ पारिभाषित की गई हैं। उक्त शासनादेश के प्रस्तर 4(2) में अधिकतम अर्हकारी सेवा 33 वर्ष को घटा कर 20 वर्ष कर दिया गया है अतः दिनांक 01-01-2006 से सरकारी सेवक को पूर्ण पेंशन प्राप्त करने हेतु 20 वर्ष की अर्हकारी सेवा करना अनिवार्य है|

                       शासनादेश संख्‍या सा-3-1541/दस-2008-308/97 दिनांक 07-01-2009 द्वारा यह व्‍यवस्‍था की गई है,कि किसी भी सरकारी सेवक की पूर्ण सेवा पेंशन उसके द्वारा आहरित वेतनमान के दिनांक 01-01-2006 से पुनरीक्षित पे बैंड तथा सम्बंधित ग्रेड पे के योग के न्‍यूनतम के 50 प्रतिशत अथवा रू0 3500-00 जो भी अधिक हो, से कम नहीं होगी। किसी भी पारिवारिक पेंशनर की पारिवारिक पेंशन सम्‍बन्धित सरकारी सेवक द्वारा आहरित अन्तिम वेतन के 30 प्रतिशत, उसके द्वारा आहरित वेतनमान के दिनांक 01-01-2006 से पुनरीक्षित पे बैंड तथा सम्बंधित ग्रेड पे के योग के न्‍यूनतम के 30 प्रतशित अथवा रू0 3500-00 में से जो भी अधिक हो से कम नहीं होगी।

                      न्यायिक सेवा के अधिकारियों हेतु 01-01-2006 से पेंशन पुनरीक्षण सम्बंधित विस्तृत आदेश शासनादेश संख्या - 2977/ दो – 4-10-45(12)91 टी सी VI दिनांक 04-11-2010 तथा शासनादेश संख्या सा-3 – 2036 / दस – 2008-308/97 टी सी दिनांक 15-12-2010 द्वारा निर्गत किये गए| पुनः शासन के कार्यालय ज्ञाप संख्या - 2472/दो-4-11-45(12)/91 टी. सी. - 4 दिनांक 27/12/11 द्वारा दिनांक 01-07-1995 से 31/12/05 के मध्य सेवा निव्रत्त न्यायिक सेवा के अधिकारियों की पेंशन पुनरीक्षण की प्रक्रिया निर्धारित की गई है| स्वायत्यशासी शासकीय अनुदानित अभियंत्रण संस्थाओं के सेवानिवृत शिक्षको / कर्मचारियों के 01-01-2006 से पेंशन पुनरीक्षण सम्बंधित विस्तृत आदेश शासनादेश संख्या – 3370 / सोलह – 1 - 2010-03(12)/2009 दिनांक 19-10-2010 तथा शासनादेश संख्या – 3369 / सोलह – 1 - 2010-03(12)/2009 दिनांक 19-10-2010 द्वारा निर्गत किये गए है|