ऐतिहासिक पृष्‍ठ्भूमि

अगस्‍त,1985 के पूर्व उत्‍तर प्रदेश के राजकीय सेवकों की पेंशनरी लाभों की स्‍वीकृतियॉ जारी करने का कार्य महालेखाकारउ.प्र. द्वारा किया जाता था। पेंशन स्‍वीकृतियों में हो रहे अनावश्‍यक विलम्‍ब एवं अन्‍य कठिनाइयों को ध्‍यान रखते हुए उत्‍तर प्रदेश शासन ने इस कार्य को शासनादेश दिनांक 06-08-1985 द्वारा प्रारम्‍भ में 4 विभागों (पुलिस, लोक निर्माण विभाग , सिंचाई ,राजस्व) के विभागाध्‍यक्षों के अधीन कार्यरत मुख्‍य लेखाधिकारियों द्वारा सम्‍पादित कराये जाने का निर्णय लिया। इस कार्य में प्राप्‍त हुई अपेक्षित सफलता के फलस्‍वरूप शासनादेश दिनांक 30-09-1986 तथा 31-03-1987 एवं 01-04-1989 द्वारा 10 अन्‍य विभागों (व्यापार कर,वन,सचिवालय प्रशासन,खाद्य-रसद, विधान परिषद्/विधान सभा,उद्योग,कृषि,ग्राम्य विकास,पशुपालन,शिक्षा ) का कार्य महालेखाकार से वापस लेकर इन विभागों में कार्यरत मुख्‍य लेखाधिकारियों को सौंप दिया गया। इसके उपरान्‍त शासन द्वारा अवशेष विभागों के सेवा निवृत्‍त राजकीय सेवकों के पेंशन स्‍वीकृति का कार्य करने के लिए पेंशन निदेशालय का गठन किया गया जो कि दिनांक 30-09-1988 अथवा इसके बाद सेवा निवृत्‍त एवं मृत शासकीय सेवकों,विशिष्‍ट पद धारियों, अखिल भारतीय सेवाओं, आई.ए.एस., आई.पी.एस. तथा आई.एफ.एस., पी. सी.एस., न्यायिक सेवा, उ.प्र. वित्‍त एवं लेखा सेवा के अधिकारियों सहित अवशेष विभागों के समस्‍त राजकीय सेवकों के पेंशन स्‍वीकृति का कार्य कर रहा है। पेंशन निदेशालय के गठन के साथ ही राज्‍य सरकार के सेवकों की पेंशन स्‍वीकृति सम्‍बन्‍धी कार्य का पूर्णरूपेण अंतरण सम्‍पन्‍न हो गया। शासनादेश दिनांक 26-05-1993 द्वारा समस्‍त विभागों के समूह '' के शासकीय सेवकों की पेंशन प्राधिकृत करने का अधिकार उनके कार्यालयाध्‍यक्षों में निहित कर दिया गया। पेंशन निदेशालय में व्‍यवहृत होने वाले अन्‍य 27 विभागों की पेंशन प्राधिकृत करने का अधिकार शासनादेश दिनांक 24-06-1996 द्वारा उनके वित्‍त नियत्रंकों को सौप दिया गया।

                   पुनः पेंशन प्राधिकार पत्रों के निर्गमन में होने वाली कठिनाइयों के निराकरण हेतु शासनादेश दिनांक 08-10-1999 द्वारा पेंशन देयों की कंप्यूटर पर आधारित प्रक्रिया तथा मंडल स्तर पर विकेंद्रीकरण की व्यवस्था लागू की गई| विकेन्द्रित व्यवस्था 01-04-2000 से प्रभावी हुई जिसके तहत राज्य के समस्त कार्यालयों के समूह 'ख' एवं समूह 'ग' के कार्मिको की पेंशन स्वीकृति का कार्य मंडल स्तर पर सृजित सयुंक्त निदेशक कोषागार एवं पेंशन कार्यालयों को दिया गया तथा समूह 'क' के समस्त अधिकारी, अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी तथा लोक सेवा आयोग एवं अन्य विशिष्ट पदाधिकारियों की पेंशन स्वीकृत करने का कार्य पेंशन निदेशालय स्तर पर सौपा गया| वर्तमान में प्रदेश के इंजीनियरिंग कालेज, खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के समस्त कार्मिक, राज्याधीन कृषि विश्वविद्यालय, पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञानं विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान, मथुरा, भातखंडे डीम्ड विश्वविद्यालय तथा न्यायिक सेवा के अधिकारीयों की पेंशन भी पेंशन निदेशालय स्तर से स्वीकृत की जा रही हैं|

                    उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन दिनांक 01-04-2005 के उपरान्त सेवायोजित कार्मिको हेतु नव परिभाषित अंशदायी पेंशन योज़ना लागू की गयी है जिसका कार्यान्वयन शासनादेश दिनांक 14-08-2008 में विहित व्यवस्था के अनुसार अनन्तिम रूप से पेंशन निदेशालय द्वारा किया जा रहा है|पेंशन निदेशालय स्तर पर नव परिभाषित अंशदान पेंशन योजना से आच्छादित कार्मिको की कटौती एवं लेखों का रख रखाव वर्ष 2011-12 तक किया गया है जो कि अप्रैल 2012 से एन.एस.डी.एल. को हस्तांतरित कर दिया जायगा | नयी पेंशन योजना के क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार द्वारा एन.एस.डी.एल. एवं एन.पी.एस. ट्रस्ट के साथ दिनांक 12 अगस्त, 2011 को अनुबंध निष्पादित कर लिया गया| उक्त संस्थाओं के साथ अनुबंध निष्पादित हो जाने के उपरान्त शासनादेश दिनांक 14 अगस्त, 2011 वर्णित अंतरिम व्यवस्था समाप्त करते हुए एन.पी.एस. आर्किटेक्चर के अनुसार व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करते हुए शासनादेश संख्या -सा-3-1065/दस-301(9)/2011, दिनांक 15 सितम्बर, 2011, संख्या-सा-3-1066/दस-2011/301(9)/2011 दिनांक 15 सितम्बर, 2011, संख्या-सा- 3-1067/दस-2011/301(9)/2011 दिनांक 15 सितम्बर, 2011 निर्गत किये गये| नयी पेंशन योजना के क्रियान्वयन हेतु निदेशक पेंशन को नोडल अधिकारी नामित किया गया है |